बीकाजी फूड्स के संस्थापक शिवरतन अग्रवाल (फन्ना बाबू) का निधन: बीकानेर ने खोया अपना 'अनमोल रत्न' | Khabar For You
- Khabar Editor
- 23 Apr, 2026
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राजस्थान के औद्योगिक जगत और वैश्विक स्नैक उद्योग के लिए आज का दिन अत्यंत दुखद है। बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल लिमिटेड के संस्थापक और सीएमडी, शिवरतन अग्रवाल, जिन्हें प्यार से 'फन्ना बाबू' कहा जाता था, का गुरुवार को चेन्नई में निधन हो गया। 73 वर्षीय अग्रवाल को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया ।
इस खबर से बीकानेर सहित पूरे देश के व्यापारिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। उन्होंने बीकानेर की पारंपरिक भुजिया को गली-कूचों से निकाल कर दुनिया के 25 से अधिक देशों तक पहुँचाया और एक बहु-अरब डॉलर का साम्राज्य खड़ा किया।
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अस्पताल में ली अंतिम सांस
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, शिवरतन अग्रवाल अपनी पत्नी के साथ चेन्नई में थे, जहाँ उनका निधन हो गया।
शुक्रवार को बीकानेर में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा, जहाँ बड़ी संख्या में उद्योगपतियों और गणमान्य लोगों के जुटने की उम्मीद है।
विरासत: 'हल्दराम' के पोते से 'बीकाजी' के बादशाह तक
शिवरतन अग्रवाल केवल एक व्यवसायी नहीं, बल्कि एक विजनरी थे। उन्होंने बीकानेरी भुजिया की पहचान को आधुनिक बनाया। वह 'हल्दराम' साम्राज्य के संस्थापक गंगाबिशन अग्रवाल के पोते थे, लेकिन उन्होंने विरासत के साथ-साथ अपनी एक अलग पहचान बनाने का निर्णय लिया।
1993 में उन्होंने 'बीकाजी' (Bikaji) ब्रांड की नींव रखी। उनके नेतृत्व में कंपनी ने कई कीर्तिमान स्थापित किए:
मशीनीकरण और स्वच्छता: उन्होंने पारंपरिक भुजिया उद्योग में आधुनिक ऑटोमेशन की शुरुआत की, जिससे गुणवत्ता और स्वच्छता के वैश्विक मानकों को पूरा किया जा सका।
वैश्विक विस्तार: आज बीकाजी के उत्पाद अमेरिका, ब्रिटेन और खाड़ी देशों सहित दुनिया भर में मशहूर हैं।
शेयर बाजार में दस्तक: साल 2022 में उनके मार्गदर्शन में बीकाजी का सफल IPO आया, जिसने कंपनी को FMCG सेक्टर की दिग्गज कंपनियों की कतार में खड़ा कर दिया।
जन-जन के प्रिय 'फन्ना बाबू'
बीकानेर में उन्हें एक उद्योगपति से कहीं बढ़कर सम्मान प्राप्त था। अपनी सादगी और मिलनसार स्वभाव के कारण उन्हें 'फन्ना बाबू' कहा जाता था। वे सामाजिक कार्यों और शिक्षा के क्षेत्र में भी काफी सक्रिय रहते थे। स्थानीय व्यापार मंडल के एक सदस्य ने भावुक होते हुए कहा, "बीकाजी भले ही एक ग्लोबल ब्रांड बन गया, लेकिन फन्ना बाबू का दिल हमेशा बीकानेर की गलियों में ही बसता था।"
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